कमल किशोर अग्रवाल
धर्म ध्वजा फहरा कर कानपुर नगर का गौरव बढ़ाने वाले, वैष्णव धर्मावलम्बी ओ महाराज पं. प्रयाग नारायण तिवारी कानपुर की महान विभूति थे। कानपुर महानगर को दो धार्मिक संस्थान आपने ऐसे प्रदान किये, जिनकी छवि आज भी और आगे आने वाले समय में भी प्रकाशवान स्तम्भ की तरह रहेगी। ये संस्थान है-प्रयाग नारायण शिवाला एवं श्री रामलीला सोसाइटी परेड।
आपका जन्म ऐतिहासिक नगर कन्नौज के मकरन्द नगर में हुआ। आप रुकमणी कृष्णदास स्वः महाराव रेवतीराम तिवारी के सुपुत्र थे। जो कालान्तर में अपने पिता जी की ही भांति रुकमणी कृष्ण जी को भक्तिपूर्ण उपाधि से अलंकृत होकर रुकमणी कृष्णदास महाराज प्रयाग नारायण तिवारी के नाम से प्रसिद्ध हुये।
महाराज श्री प्रयाग नारायण तिवारी स्वयं धार्मिकता की प्रतिमूर्ति तो थे ही साथ ही जो भी सम्पर्क में आता था, उसमें भी धर्म भाव भरने को आतुर रहते थे। आज हम जिसे परेड मैदान के नाम से जानते है। वहां महाराज जी के समय में सैनिकों की परेड होती थी। इन सैनिकों में अनेक धार्मिक प्रवृत्ति के हिन्दू भी थे। ये सैनिक प्रायः मन्दिर में जाकर पं. प्रयागनारायण जी का सत्संग करते थे। आपकी प्रेरणा से ही वे सैनिक परेड मैदान में दशहरे के अवसर पर रामलीला का आयोजन करने लगे। कुछ ही समय में इस रामलीला ने एक परम्परा का रूप ले लिया। महाराज पं. प्रयाग नारायण जी ने इस लीला के लिये सन् 1977 में एक सुविख्यात सोसाइटी बनायी जिसे आज श्री रामलीला सोसाइटी परेड के नाम से जाना जाता है। आप वर्ष 1877 से 1881 तक श्री रामलीला सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष रहे। आपने नगर के सम्भ्रान्त धार्मिक जनों को एकत्र करके सोसाइटी को विस्तृत रूप दिया। श्री महाराज प्रयाग नारायण जी की आज्ञानुसार आज भी श्री रामलीला के प्रारम्भ में श्री तिवारी जी के परिवार से मुकुट पूजन करने के बाद ही लीला प्रारम्भ होती है। आपके प्रपौत्र पं. बद्रीनारायण जी तिवारी आज भी श्री रामलीला के कार्यक्रमों में उपस्थित होकर तन-मन-धन से यथा शक्ति सहयोग प्रदान करते हैं।
ऐसे समय में पुण्यात्माओं का स्मृति चिन्तन कर उनके प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करें। इसी भाव का अनुगमन करते हुये महाराज पं. प्रयाग नारायण तिवारी के श्री चरणों में अपना नमन करते हुये पूर्ण समर्पण भाव में श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूँ।
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