Monday, February 23, 2026

मानस संगम : (स्थापना वर्ष 1966)

जीवात्मा का परमात्मा से संगम, समाज का मानस-साहित्य से संगम ही ‘मानस संगम’ का ध्येय रहा है। मानस संगम, कानपुर, उत्तर प्रदेश की एकमात्र साहित्यिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, वैचारिक बोध की गरिमामयी संस्था है जो नगर के हृदय स्थल में स्थित महाराज प्रयाग नारायण मंदिर शिवाला परिसर से अपनी विभिन्न गतिविधियों का संचालन विगत वर्षों से कर रही है। प‌द्मविभूषण पं. श्रीनारायण चतुर्वेदी ने 1966 में मानस संगम की स्थापना के प्रथम समारोह में कहा था यह ऐतिहासिक आयोजन है।

इसी मंच से पं. रामकिंकर जी के श्रीमुख से रामकथा के पावन प्रसंग दशकों तक सुने-सुनाए गए। डॉ• सय्यद महफूज हसन रिजवी ‘पुण्डरीक’ का यह कथन अत्यन्त सारगर्भित है कि मानस संगम संस्था नहीं बल्कि वर्ष 1966 से ही आन्दोलन की भूमिका अदा कर रहा है।

मानस संगम संस्था की अपनी विशिष्ट ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं धरोहर है जिसके माध्यम से संस्था धार्मिक प्रवचनों के आयोजन, वार्षिक पत्रिका एवं विभिन्न पुस्तकों के प्रकाशन के साथ ही विद्वानों, साहित्यकारों, कलाकारों के सम्मान एवं पुरस्करण के कार्य निष्पादित करती आ रही है। संस्था ने मुक्त हृदय से विदेशों से पधारे एवं पधारी श्रीरामचरितमानस अनुरागी एवं अनुरागिनी भाई-बहनों एवं हिन्दी-प्रेमियों के व्याख्यानों, भाषणों एवं प्रवचनों का आयोजन तो किया ही है, उन्हें सम्मानित एवं पुरूस्कृत भी किया है|

मानस संगम ने तुलसी ने साहित्य से सम्पृक्त विदेशी विद्वानों की मूर्तियों को औद्योगिक नगरी कानपुर के मोतीझील के तुलसी उपवन में स्थापित कर एक नए अध्याय की सृष्टि की है। ‘तुलसी उपवन’ कानपुर की सामयिक एक समावेशी संस्कृक्ति का प्रतीक है जो प्रागैतिहासिक काल से अब तक इसके इतिहास तथा पुरातत्व को संरक्षित किए है।

मानस संगम संस्था अनैतिकता, असत्य, अविवेक, यौनाचार, अत्याचार आधृतविकास-यात्रा को विरोधी है। वह विश्वपूज्य बाल्मीकि के अवतार, शिव-पार्वती, सीता-राम, सत्यभामा श्रीकृष्ण भक्त तुलसीदास तथा उनकी दिव्य कृतियों को अपनी तथा मानव जाति की अमिट, अक्षय, अतुल्य सम्पदा स्वीकारती है।

इस संस्था ने विश्वकवि तुलसी की छत्र-छाया में समग्र मानव के उत्कर्ष, प्रगति, वैचारिक उन्नति एवं विकास को ध्यान में रखकर मानवीय सामासिक-समावेशी विकास को नई दिशा दी है। तुलसी भारत के प्रतीक कवि हैं वे वाल्मीकि और व्यास जी सदृश्य जन-जीवन के प्राण है।

डॉ. गिरिराज किशोर, डॉ. प्रतीक मिश्र, डॉ. सूर्य प्रसाद शुक्ल, प्रोफेसर रमेश तिवारी ‘विराम’, डॉ. नरेन्द्र कोहली, डॉ. शैल चतुर्वेदी, डॉ. रामकृष्ण शर्मा, डॉ. कमलेश शर्मा, श्री राम शरण श्रीवास्तव, डॉ. गिरिजाशंकर त्रिवेदी, आचार्य सेवक वात्स्यायन, श्री सुरेन्द्र प्रताप सिंह एडवोकेट, सुकवि वाहिद अली ‘वाहिद’, कमलेश द्विवेदी, ब्रह्मलीन भाभी जी श्रीमती अन्नपूर्णा तिवारी का स्नेह, श्री निवास शर्मा, श्री कमलाशंकर अवस्थी, डॉ. सत्यकाम पहारिया, डॉ. राष्ट्र बन्धु, डॉ. उमाशंकर शुक्ल, ‘उमेश’, श्री धनंजय अवस्थी, डॉ. शिवबहादुर सिंह भदौरिया, डॉ. चक्रधर ‘नलिन’, आदि मानस संगम परिवार का हिस्सा हैं|