Wednesday, October 28, 2026

शिवाला बाज़ार : स्वागत, साहित्य, शहनाई, और स्वाद की कहानी


अरविन्द त्रिपाठी
सेवानिवृत्त, कार्य प्रबंधक
लघु शस्त्र निर्माणी – कानपुर
रक्षा मन्त्रालय, भारत सरकार
कानपुर के घुमक्कड़ सुपर 50
कानपुर टूरिज़्म क्लब

शिवाला बाज़ार, कानपुर का वह क्षेत्र है जहाँ की खरीदारी किये बिना किसी के घर में “ शहनाई “ बजने की कल्पना नहीं कर सकते हैं. जी हॉं, हम बात कर रहे , कानपुर के ह्रदय स्थल बडा़ चौराहा के समीप स्थित वह मार्केट जिसे आप लोग “ प्रयाग नारायण शिवाला “ कहते हैं.

यह कानपुर शहर का एक ऐसा बाज़ार है, जहाँ पर कानपुर वासी ही नहीं अपितु नगर के चारों दिशाओं से अन्य नगरों से भी लोग शादी, यज्ञोपवीत,मुंडन, कर्ण छेदन, धार्मिक अनुष्ठान और इवेंट आदि के लिए यहाँ आते हैं. बिना यहाँ पर खरीदारी किये, आपके किसी भी समारोह की पूर्णता की परिकल्पना सम्भव नहीं है .

प्रायः सभी लोग इस क्षेत्र को “ प्रयाग नारायण शिवाला “ के नाम से पुकारते हैं , लेकिन यह नाम दो मन्दिरों को मिलाकर बना है, ऐसा बहुधा लोग नहीं जानते हैं. एक मन्दिर का नाम है “ प्रयाग नारायण मन्दिर “ जो कि भगवान विष्णु को समर्पित है, वहीं दूसरे मन्दिर को “कैलाश मन्दिर “ कहते हैं. यहाँ पर भगवान शिव का अद्भुत , अनुपम , अलौकिक और दिव्य विशाल शिवलिंग विराजमान है.आइये पहले उपरोक्त दोनों मंदिरों के बारे में संक्षिप्त रूप से जान लेते हैं…
प्रयाग नारायण मन्दिर— शिवाला स्थित यह मन्दिर हमें दक्षिण भारतीय शैली से परिचित कराता है. मन्दिर की स्थापना सन् 1861 में हुई थी और इसका निर्माण कार्य 14 वर्षों में पूरा हुआ था. दक्षिण भारत से ग्यारह सौ आचार्य पूजा अर्चना के लिए आये थे. मन्दिर में तमिल और संस्कृत के श्लोकों के मन्त्रोच्चारण से पूजा अर्चना होती है. यहाँ पर नाना राव पेशवा के समय के दो नगाड़े हैं जो कि आरती के समय आज भी बजाये जाते हैं. उत्तर और दक्षिण भारत की संस्कृति के सात्विक संगम को दर्शन करने की इच्छा रखने वाले भक्तों की मनोकामनाएँ इस बैकुंठ मन्दिर में अवश्य पूरी होती हैं.

कैलाश मन्दिर— यहाँ पर भगवान शिव का अद्भुत,अलौकिक एवं दिव्य शिवलिंग विराजमान है. इस शिवलिंग की एक विशेषता यह है कि यह मन्दिर के दरवाज़े से बड़ा है. इतना विशाल शिवलिंग कैसे प्रवेश कराया गया इसकी भी आस्था से जुड़ी कथा है.

कैलाश मन्दिर प्रांगण में हनुमान जी, भैरव जी, गौरी- शंकर, गंगा – यमुना, ब्रह्मा- सरस्वती, जगन्नाथ जी, सुभद्रा- बलभद्र, राम- लक्ष्मण जानकी, बद्रीनाथ जी की काली मूर्ति, गणेश कार्तिकेय, भगवान लक्ष्मीनारायण आदि के भी मन्दिर हैं.

कैलाश मन्दिर परिसर में प्रकांड विद्वान लंकापति का “ दशानन मन्दिर “ भी है. यह वर्ष में केवल एक बार विजयादशमी को खुलता है. सब लोग जब रावण- बध का उत्सव मनाते हैं तब यहॉं पर लंकापति दशानन की पूजा होती है. यहीं पर “ माता छिन्नमस्तिका “ का मन्दिर भी है, जो कि वर्ष की दोनों शारदीय और वासंतिक नवरात्रि की षष्ठी, सप्तमी और अष्टमी तिथि को दर्शन करने के लिये खोला जाता है.

जहॉं प्रयाग नारायण मन्दिर के प्रांगण में अंदर बाहर चूड़ियों- कंगनों, भगवानों के सिंहासन, वस्त्र व श्रृंगार, सौंदर्य प्रसाधन, तीज त्योहारों में प्रयुक्त होने वाली सामग्रियों की भरमार है, तो वहीं ब्रांडेड, एंटीक व आधुनिक शैली के डिज़ाइनर रेडीमेड कपड़े तक मिलते हैं..

कैलाश मन्दिर के परिसर में प्रातः काल विशाल फूलों की मंडी लगती है, जहाँ पर पूजा और सजावट के लिए देशी विदेशी भांति भांति प्रकार के फूल आप ख़रीद सकते हैं.

प्रयाग नारायण मन्दिर और कैलाश मन्दिर के बीच एक सड़क है, इसका नाम “ खास “ बाज़ार है. ये खास क्यों न हो? जहॉं पर भगवान, भगवानों और देवी देवताओं का श्रृंगार करने के लिए उनके आभूषण और वस्त्र मिलते हैं. इसी सड़क के दोनों ओर वर- वधू के लिए विवाह या अन्य कोई भी किसी भी प्रकार के समारोहों में पहनने वाले ब्रांडेड डिज़ाइनर वस्त्र जैसे ः- सूट, शेरवानी लहँगा और साड़ी आदि मिलते हैं. यहाँ पर लोग शादी आदि तय होते ही अपनी पसंद के कपड़े लेने दूर दराज़ से आने लगते हैं.

खास बाज़ार इसलिए भी ख़ास है कि यहाँ पर शादी समारोहों आदि में दिये जाने वाले उपहारों से लेकर तीज त्योहारों , पर्वों और इवेंट में भेंट करने वाले गिफ्टों की पैकिंग मैटेरियल के साथ-साथ रेडीमेड पैकिंग आइटम विभिन्न शेप एवं साइज़ के उचित मूल्यों पर उपलब्ध हैं. इस बाज़ार में कपड़ों की रंगाई का कार्य भी बखूबी किया जाता है.

यहाँ पर हर वर्ग की सुविधानुसार से कपड़े उपलब्ध हैं. यहॉं तक व्यवस्था है कि अगर आप कपड़े खरीद नहीं सकते हैं तो किराये पर ले सकते हैं. यह सुविधा पुरुषों और महिलाओं को समान रूप से मिलती है. लड़कियॉं और महिलाएँ तो अपने लहंगे या साड़ी की मैचिंग के अनुरूप आर्टिफ़िशियल ज्वैलरी महिनों पहले से बुक करा लेती हैं. शिवाला बाज़ार में सौंदर्य प्रसाधन की कई वैरायटी के साथ- साथ एंटिक, आधुनिक और टेम्पल ज्वैलरी का भी बहुत बड़ा कलेक्शन मिलता है .

शिवाला बाज़ार के पीछे की ओर कानपुर का एक प्रमुख बाज़ार है जिसे “ चौक “ कहते हैं. यहाँ पर सोने – चॉंदी की ज्वैलरी, स्टेशनरी, सजावटी सामानों के साथ – साथ त्योहारी बाज़ार की रौनक वर्षपर्यंत रहती है. यहाँ पर प्रदेश के अन्य जिलों से भी लोग खरीदारी करने आते हैं. यहीं पर शादी समारोह आदि के लिए निमंत्रण पत्र ₹10 से लेकर ₹ 1000- तक मिलते व छपते हैं.

शिवाला बाज़ार के सामने बड़ा चौराहे पर कानपुर नगर का सबसे बड़ा Z स्क्वायर मॉल है . जहाँ से भी लोग खरीदारी करते हैं.
शिवाले के पूर्वी ओर जहाँ वाद्य यंत्रों और नाटक – ड्रामा आदि में पहने जाने वाले विभिन्न ड्रेसों का भी बहुत बड़ा बाज़ार है. वहीं पश्चिमी ओर मेस्टन रोड पर जूता चप्पल, रेडीमेड कपड़ों, बैग- सूटकेस, जनरल आइटम से लेकर बन्दूक और कारतूस आदि की दुकानें भी हैं.

जब आप यहाँ खरीदारी करते हुए थक जायें तो पेट- पूजा के लिए भी यहॉं व्यवस्था है. शिवाला के सामने बडा़चौराहा तक, बायीं ओर रामनारायण बाज़ार तक और दाहिनी ओर तिलक हॉल तक अनेक स्वादिष्ट चाट- बताशे, इडली- डोसा, इटालियन / चाइनीज़ स्नैक्स और मिठाइयों की दुकानें हैं. यहाँ पर कुछ खाकर खरीदारी की थकान को मिटाकर ऊर्जावान हो सकते हैं. बड़ा चौराहा के समीप कानपुर की मिठाइयों के आइकॉन “ ठग्गू के लड्डू “ और “बदनाम कुल्फी” का भी स्वाद चख सकते हैं

यूँ समझिये कि बस आपको शादी समारोहों आदि का शुभ संकल्प करना है और उसके बाद चले आइये…प्रयाग नारायण शिवाला बाज़ार, जहॉं पर आपकी आवश्यकता की सभी चीजें जैसे ः- सुई से लेकर शेरवानी तक और मण्डप से लेकर माथे की बिंदिया तक सब कुछ यहॉं मिल जायेगा… बस आपके पहुंचने की देर है…
आशा ही नहीं विश्वास है कि अब आप समझ गये होंगे कि प्रयाग नारायण मन्दिर, कैलाश मन्दिर और खास बाज़ार को लेकर सम्पूर्ण क्षेत्र को ही “ प्रयाग नारायण शिवाला “ बाज़ार कहते हैं..

इसलिए आगे जब भी आप शिवाला बाज़ार जायें तो यहाँ पर चूड़ियों की खनखनाहट से लेकर मन्दिर की घंटियों की ध्वनियों को अवश्य आत्मसात् कीजियेगा…..इसके साथ-साथ यहाँ के भाँति भाँति के स्वादों से भरपूर विभिन्न प्रकार के व्यंजनों को अवश्य चखियेगा..

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