13 दिसम्बर 1934 को कानपुर में जन्में पं० ब्रदी नारायण तिवारी ने अपने जीवन में असीम उपलब्धियाँ हासिल कर्की, उनके पिता पं० शेष नारायण तिवारी जी प्रख्यात समाजसेवी और कानपुर के पूर्व म्युनिसिपल कमिश्नर थे। तो वहीं चाचा पं० वेंकटेश नारायण तिवारी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे जो आजादी के बाद कानपुर ग्रामीण क्षेत्र से कांग्रेस के प्रथम सांसद भी रहे जिनकी स्मृति में उत्तर प्रदेश विधानसभा में पुस्तकालय कक्ष भी स्थापित है।
दुखद बात यह रही कि डेढ़ वर्ष की अल्प आयु में ही पं० बद्री नारायण के सर से पिता का साया उठ गया, जिसके कुछ माह बाद ही माँ भी गुजर गई, उनके पालन-पोषण का बीड़ा परिवार के सहयोगी सेवक राम भरोसे वि वकर्मा जी ने उठाया, जिन्हें पं० बद्री नारायण आजीवन पितातुल्य संरक्षक का सम्मान देते रहे, और उनके ना रहने पर उनका श्राद्ध आदि भी पं० बद्री नारायण जी ने ही किया, वे उन्हें पिता स्वरूप में देखते व इज्जत देते तो वहीं राम भरोसे जी भी पूरे हक से अपने बद्री को डांटने का अधिकार जमाया करते थे।
राम भरोसे जी ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे, उनको राम कथा सुनने का शौक था, वे बालक बद्री को भी अपने कंधों पर बिठाकर रामलीला दिखाने ले जाया करते थे। बद्री नारायण जी के अनुसार राम भरोसे जी द्वारा प्राप्त संस्कारों से ही उन्हें मानस और तुलसी के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिली थी। बद्री नारायण जी को विद्यावाचस्पति (मानद उपाधि) दी गई थी। पं० बद्री नारायण जी का विवाह फतेहपुर जिले की मूल निवासी अन्नपूर्णा तिवारी से हुआ, जो बड़ी ही कर्मठ और जिम्मेदार महिला थीं।
पं० श्री नारायण चतुर्वेदी को डॅ० बद्री नारायण तिवारी अपना साहित्यिक गुरु मानते थे। वह हिन्दी साहित्य के भीष्म पितामह कहलाते थे। उन्होंने प्राचीन इतिहास पर एम.ए. लंदन से किया था। पंडित श्री नारायण चतुर्वेदी ने अपने हस्ताक्षर सहित कई पुस्तकें डॉ० बद्री नारायण तिवारी को अपने हस्ताक्षर के साथ भेंट स्वरूप प्रदान की थीं। पंडित श्री नारायण चतुर्वेदी जी ही सोहनलाल द्विवेदी, भगवती चरण वर्मा अभिभावक स्वरूप थे।
बद्री नारायण तिवारी जी की विचार अभिव्यक्ति इतनी प्रबल थी, कि उनके लेख वर्धा की राष्ट्रभाषा, कादम्बिनी, वीणा, इंडिया टुडे, आउटलुक, साहित्य अमृत जैसी पत्रिकाओं के अतिरिक्त दैनिक जागरण, राष्ट्रीय सहारा, नेपाल के हिमालनी जैसे पत्रों में छपा करते थे। हिन्दू मुस्लिम एकता के केन्द्र बिन्दु थे पडित बद्री नारायण, धार्मिक भेदभाव का कण भी उनके जेहन में कभी नहीं था, इसलिए ही हिन्दी के साहित्यिक मंच से कई बड़े मुस्लिम साहित्यकारों का सम्मान होता रहा, उन्होंने ही मुस्लिम बहनों को तैयार किया था जो कार्यक्रमों में वंदेमातरम् की बेहद रोमांचक प्रस्तुति दिया करती थीं, के अतिरिक्त उन्होंने संपादकों की एक पीढ़ी को भी तैयार किया था। वे स्वयं हिन्दी के प्रचार प्रसार को समर्पित लगभग ढाई सौ पृष्ठ की ‘मानस संगम’ अंतर्राष्ट्रीय वार्षिक पत्रिका का प्रकाशन करते थे।
साहित्यकारों, कवियों, लेखकों के लेखन एवं उत्कृष्ट कृक्तियों को प्रकाशित और पुरस्कृत करने में वह सदैव अग्रणी रहे थे। रक्तदान, भूकंप पीड़ित सहायता एवं सुनामी पीड़ित सहायता के कार्यक्रमों में उनकी अहम भूमिका रहती थी, फौक्षिक एवं विवाह कार्यों में सहायता करना उनकी दिलचस्पी थी। इसी के साथ ही वर्ष 1857 की क्रांति के अमर सेनानी तात्या टोपे के पौत्र बिठूर निवासी नारायण राव टोपे के परिवार की दैनिक स्थिति को उजागर कर समाज के सामने लाने वाले पं० बद्री नारायण ही थे, उनके माध्यम से ही केन्द्र सरकार द्वारा टोपे परिवार की पुत्री को रेलवे में नौकरी एवं नगद आर्थिक मदद का सहयोग दिया गया।
उनकी साहित्य सेवा ने हरिवंश राय बच्चन, डॉ० वेद प्रताप वैदिक, महादेवी वर्मा, सोहन लाल द्विवेदी, प्रताप नारायण मिश्र, श्याम लाल गुप्त पार्षद, श्री नारायण चतुर्वेदी, रामानन्द सागर, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की साथी मानवती आर्या, पद्मश्री गिरिराज किशोर जैसे व्यक्तित्वों को प्रभावित किया, पं० बद्री नारायण जी के जीवन में ऐसे अनेक व्यक्तित्व शुमार रहे जिन्होंने कानपुर आकर मानस संगम के मंच से अपने उद्गार प्रस्तुत किये। पं० बद्री नारायण तिवारी जी पर कई पीएचडी भी हो चुकी हैं। उनके द्वारा बनाई संस्था मानस संगम का कद अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तक ऊँचा हो गया, तमाम देशों के प्रतिनिधि एवं राजदूत इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने लगे, मानस संगम संस्था पर हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल उत्तराखंड तथा छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर एवं आंध्र विश्वविद्यालय द्वारा शोध कार्य किया जा चुका है।
डॉ० बढी नारायण तिवारी जी संस्था भारत सेवक हिन्दी-उर्दू समिति उत्तर प्रदेश कानपुर के अध्यक्ष रहे, महात्मा गांधी द्वारा संस्थापित राष्ट्रभाषा समिति वर्षा गुजरात के उ०प्र० संयोजक रहे पूर्व अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन लखनऊ के रहे जो पुरुषोत्तम दास टंडन द्वारा 1937 में स्थापित किया गया था। वे ब्लड डोनर्स एसोसिएशन कानपुर के संरक्षक और कानपुर संग्रहालय के आजीवन सदस्य एवं संयोजक के साथ ही साथ अनेक शिक्ष संस्थान एवं महाविद्यालय के पदाधिकारी थे, जिनमें पं० सहदेव त्रिवेदी महाविद्यालय रमईपुर, पंडित जवाहर लाल नेहरू इंटर कॉलेज के वे अध्यक्ष रहे तो वहीं संत नागा बाबा महाविद्यालय हमीरपुर के उपाध्यक्ष तो वहीं तुलसी इंटर कॉलेज, चित्रकूट एवं बिल्हौर इंटर कॉलेज कानपुर के सदस्य भी रहे।
उनका हिन्दी प्रेम इतना प्रगाढ़ था कि एक तरफ उन्होंने जहाँ वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रताप वैदिक जी के हिन्दी हस्ताक्षर अभियान का झंडा बुलन्द कर रखा था तो वहीं निजी रूप से वह उन आयोजनों का हिस्सा नहीं बनते थे, जिन पर अंग्रेजी बुलावा लिखा रहता था। वे विनम्रतापूर्वक साझा भी करते थे कि अंग्रेजी में छपे होने के कारण मैं नहीं आ पाऊँगा, उनका मानना था कि इससे “देसी लोगों में अंग्रेजी का गुरूर बढ़ना बंद होगा”, उन्होंने कई मेडिकल डॉक्टरों के लेटर हेड भी हिन्दी में बदलवाए थे।
पद्म विभूषण शिवमंगल सिंह सुमन जो अटल बिहारी बाजपेयी जी के गुरु भी रहे उन्होंने बद्री नारायण तिवारी जी को “राम कथा मुस्लिम साहित्यकार” किताब डॉ० बद्री नारायण जी को 1000 रु० का प्रथम पुरस्कार दिया था। एक बार के भाषण में उन्होंने कहा भी था कि “मुझे बद्री नारायण जैसे 5-6 पागल मिल जाएं तो मैं इस देश में साहित्य की क्रान्ति ला दूं।
साहित्यिक सामाजिक समरसता एवं सांस्कृतिक कार्यों में अग्रणी श्री बद्री नारायण जी ने वसुधैव कुटुम्बकम का प्रतीक “तुलसी उपवन” का निर्माण कराकर नगर निगम, कानपुर को समर्पित किया। जिसे आम जनमानस ने प्रेरक दर्शनीय स्थल के रूप में मान्यता प्रदान की है। इस उद्यान में तुलसी प्रतिमा के अतिरिक्त शबरी राम, केवट राम मिलन, जटायु मिलन, वशिष्ठ केवट मिलन के प्रेरक प्रसंग वाली आदमकद प्रतिमाएं सामाजिक समरसता हेतु स्थापित हैं। तुलसी प्रतिमा स्थापना व सामाजिक सद्भाव-विभोर चित्रण कर “तुलसी जयन्ती” पर्व पर प्रति वर्ष प्रातः काल 6:00 बजे “तुलसी जयन्ती समारोह” तुलसी को समकालीन एवं अव्यसन मनीषियों के विचार 25 हजार शब्दों के लिखे शिलालेख, तुलसी के प्रेरक प्रसंगों पर मूर्तिमान चित्रण, भारत का एकमात्र चित्रण, भारत का एकमात्र साहित्यिक विशाल उद्यान पार्क, हिन्दी भाषा तथा तुलसी साहित्य पर सर्वप्रथम शोध कार्य करने वाले इटैलियन विद्वान डॉ० एल०सी० टेसीटोरी की प्रथम प्रतिमा तथा राम साहित्य पर शोध कार्य करने वाले डॉ० कामिल बुल्के की प्रतिमा भारत में सर्वप्रथम श्री बद्री नारायण जी द्वारा लगवायी गयी। इसी प्रकार प्रख्यात समाजसेवा पद्म विभूषण नाना जी देशमुख ने बुल्के के प्रतिमा अनावरण समारोह में कहा था कि यह राष्ट्र की धरोहर है, इसे मैं भी चित्रकूट में लगवाऊँगा। उर्दू पत्र रोजनामा, “सियासत जदीद ने उस उक्त उपवन पर सम्मति दी कि बहैसियत यह पार्क न सिर्फ कानपुर वालों, बल्कि देशवासियों के लिए एक नायाब तोहफा की हैसियत रखता है, जो कि तुलसीदास पर रिसर्च स्कालरों के लिये मसावन और मददगार साबित होगा। रूस के अकादमीशियन अलकराई वरान्निकोव की संसार में एकमात्र प्रतिमा की स्थापना “तुलसी उपवन” में है इन्होंने रूसी भाषा में मानस का पद्यानुवाद 10/12 वर्षों में किया। इसी महान कार्य पर रूस का सर्वोच्च सम्मान “ऑर्डर ऑफ लेनिन” उन्हें प्रदान किया गया था।
कानपुर शहर के तुलसी उपवन को जान समझ रहा था कि तभी एक रोज शहीदे आजम भगत सिंह के सहयोगियों में से एक रहे शिव वर्मा जी जो कानपुर में ही रहते थे उन्होंने शिवाला जाकर पं० बद्री नारायण तिवारी से हमेशा की तरह मुलाकात की, जिसमें आग्रह करते हुए कहा कि तिवारी जी ने अपने नगर के साहित्य प्रेमियों व तुलसी अनुयायियों के लिए तुलसी उपवन की तो स्थापना कर दी है लेकिन अगर शहर में क्रांतिकारियों की स्मृतियाँ नहीं संजोई गई तो अगली पीढ़ी कभी इन्हें याद करना तो दूर बल्कि इनकी शहादत के बारे में जान भी नहीं पाएगी। शिव वर्मा जी के इस विचार ने पंडित बद्री नारायण को इस कदर प्रभावित किया कि उन्होंने नई पीढ़ी की जानकारी हेतु स्वतंत्रता संग्राम में देश के शहीदों की भूमिका को प्रकाशित करने के उद्देश्य से कानपुर में फाहीद उपवन नाना राव पार्क की स्थापना 18 सितम्बर 1992 को की, जिसमें जन सामान्य की स्मृति में विलुप्त वीरांगना अजीजन बाई की प्रतिमा स्थापना और जीवन परिचय की खोज के साथ ग्रंथ लेखन प्रकाशन कार्य। शहीद वीरांगना मैनावती की प्रतिमा स्थापित कर शहीदों के प्रिय गीतो के शिलालेख। “प्यामे आजादी के सम्पादक अजीमुल्ला 1857 में प्रकाशित कविता का आंकलन और स्वतन्त्रता सेनानियों के दस्तावेजों का शिलालेख में विवरण। भारत के सभी प्रदेशों के क्रान्तिकारियों की राष्ट्रीय कविताओं का उन्हीं की भाषा में विलालेखों में अंकन। अमर फाहोद 133 रणबांकुरों को अपनी जीवन फाखाओं में प्राणत्सर्ग कराने वाले “बूढ़ा बरगद का इतिहास लेख व शिलालेख। “शहीद उपवन” स्थापना समारोह में देश के 22 क्रान्तिकारियों के मध्य शहीद भगत सिंह के अनुज सरदार कुलतार सिंह, सरदार राजेन्द्र सिंह और अशफाकउल्ला के पौत्र अशफाक उल्ला खां ने कहा कि संयोजक (बद्री नारायण तिवारी) ने आज हमारी आँखों के समक्ष भगत भैया व खां को लाकर खड़ा कर दिया है। 1857 क्रान्ति के अमर सेनानी तात्या टोपे के पौत्र नारायण राव टोपे भी बिठूर से भाग लेने आये थे। अध्यक्षता की भगत सिंह के साथी सेनानी शिव वर्मा जी ने जो काला पानी की सजा अण्डमान में काटी थी।
मानस संगम के प्रतिवर्ष दिसम्बर माह में आयोजित होने वाले मानस संगम के अपने ही वार्षिक 44वे समारोह सन् 2012 में अपने देह मरणोपरान्त देह दान की घोषणा मंच से कर दी। देहदान का संकल्प पत्र भर दिया कि कानपुर मेडिकल कालेज को हमारा देहदान कर दिया जाये और अंततः हुआ भी यही, ये जीवंत प्रमाण था कि उन्होंने अपनी कथनी और करनी में आखिरी साँसों तक फर्क नहीं किया।
पत्रिका के इस अंक की अपनी एक सीमित सीमा है अन्यथा किसी भी दायरे में ना बंधने वाले पं० बद्री नारायण तिवारी जी के अनेक जीवन चक्र और उनके कृक्तित्वों पर एक ग्रन्थ लिखा जा सकता है।
*बद्री नारायण जी द्वारा सामाजिक एवं साहित्यिक विषयों पर लिखित, संपादित एवं प्रकाशित कुछ प्रमुख पुस्तकें*
• मुस्लिम कलमकारों की इन्द्र धनुषीय रामकथा
• रामकथा और मुस्लिम साहित्यकार-२ खण्ड (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, विश्व हिन्दी प्रतिष्ठान दिल्ली एवं नेशनल इंट्रीगेशन सोसायटी आफ इण्डिया इलाहाबाद द्वारा प्रशास्ति)
• विश्वकवि तुलसी और मुस्लिम कलमकार
• वोल्गा और गंगा के सेतुःयारान्निकोय
• राष्ट्रीय क्रान्ति के वैतालिक
• झण्डा ऊंचा रहे हमाराः पार्षद जी
• गोस्वामी तुलसीदास समाज के पथ प्रदर्शक
• रूस के तुलसीदास
• मानस यात्राः पगडण्डी से सागर पार-विदेश यात्रा वृत्तांत (लाकोपर्ण सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री वी.एन.खरे)
• प्रदक्षिणा
• निहारिका
• अर्थ का अनर्थ
• इन्द्रधनुषीय बलदानियों की दृष्टि में गुपीय कथा-यात्रा
• रामकथा के अचर्चित पात्र
• पंच पल्लव
• दो अमर राष्ट्रभाषा हिन्दी
• मानवीय मूल्यों के प्रतिनिधि श्री राम (बैंकाक में लोकार्पित)
• व्यंग्य चित्रकारों की दृष्टि में तुलसीदास
• तुलसी एक केन्द्र बिन्दु शाधकर्ता शत शत
• मानस भूमिका का हिन्दी अनुवाद (लोकापर्ण मारीशस के प्रधानमंत्री पोर्टलुई में)
• राष्ट्रकवि सोहन लाल द्विवेदी अंक
• कविता बोलती है
• राष्ट्रपति अब्दुल कलाम चित्रकूट की ओर
• तुलसी के राम (हिन्दी साहित्य सम्मेलन एवं विश्व हिन्दी प्रतिष्ठान नई दिल्ली द्वारा पुरस्कृत)
• आतंकः तुलसी की दृष्टि में
• हिन्दी एकः संस्मरण अनेक
• सतों एवं सेनानियों के संघर्ष की भाषाः बढ़ती हिन्दी सन् 2012 में (दक्षिण अफ्रीका के विश्व हिन्दी सम्मेलन में लोकार्पित)
*सामाजिक सेवाओं के लिए प्राप्त सम्मान एवं पुरस्कार*
• “नेशनल इन्ट्रीगेशन ऑफ इण्डिया” इलाहाबाद द्वारा राष्ट्रीय एकता सम्मान यह सम्मान उरण न्यायालय इलाहाबाद के पूर्व न्यायमूर्ति एवं राज्यपाल राजस्थान श्री अंशुमान सिंह द्वारा प्रदत्त ।
• मारीशस सरकार द्वारा पोटलुई में महर्षि अगस्त्य 2003 सम्मान।
• उत्तर प्रदेश हिन्दी सस्थान (उ०प्र० सरकार द्वारा संचालित) द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान। विश्व हिन्दी प्रतिष्ठान एवं रामायन विद्यापीठ (सोधीरोड) नई दिल्ली के संस्थापक/अध्यक्ष डा० कर्ण सिंह द्वारा नई दिल्ली में सम्मानित। विद्यावचस्पति (पी.एच.डी.) की उपाधि विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ गांधी नगर ईशापुर (भागलपुर)
• कानपुर नगर कॉग्रेस कमेटी द्वारा ‘स्वतंत्रता की स्वर्ण जयन्ती वर्ष” 15 अगस्त 1967 सम्मान प्रशास्ति-पत्र।
• हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग की सर्वोच्च उपाधि “साहित्य वाचस्नति” मानद उपाधि हिन्दी दिवस सितम्बर सन् 2005
• अन्तर्राष्ट्रीय भारतीय भाषा तथा संस्कृत फाउण्डेशन सागर, मध्य प्रदेश द्वारा “सारस्वत सम्मान”।
• साहित्य अकादमी सम्मान नई दिल्ली द्वारा राष्ट्रकवि सोहन लाल द्विवेदी जन्मशताब्दी संगोष्ठी को उद्घाटन 28 मार्च 2007 अध्यक्षता श्री लक्ष्मीनल सिंघवी पूर्व राजदूत इंग्लैण्ड एवं सम्पादक “साहित्य अमृत”
• गुजरात हिन्दी विद्यापीड, अहमदाबाद औट्या (गुजरात) द्वारा साहित्य श्री उपाधि।
• रोटरी इन्टरनेशनल डिस्ट्रक्ट 3110 कानपुर द्वारा सामाजिक सेवाओं के लिए सम्मानित।
• कला भारतीय संस्थान (देवरिया) उ०प्र० द्वारा सम्मानित।
• प्रेम शंकर गुप्ता द्वारा स्थापित इटाया हिन्दी सेवानिधि सम्मान।
• न्यायमूर्ति श्री राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त शताब्दी समारोह, फैजाबाद में सम्मानित द्वारा डॉ० अतुल कुमार बनर्जी
• कुलपति अवध वि०वि। साहित्य मण्डल (राजस्थान) द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान 2008
• मध्य प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन ग्वालियर द्वारा सम्मान, (प्रशास्ति)
• उत्तर प्रदेश रत्न सम्मान 2006 द्वारा आल इण्डिया कान्फ्रेंस ऑफ इन्टेलेक्चुअल मेरठ।
• भारतीय भाषा प्रतिष्ठान सम्मान पत्र-2012 द्वारा भारतीय भाषा प्रतिष्ठान राष्ट्रीय परिषद उ०प्र०
• सन् 2013 में तुलसी मानस प्रतिष्ठान भोपाल (म.प्र.) द्वारा सम्मानित एवं व्याख्यान
• साहित्य मंडल श्रीनाथ (राजस्थान) द्वारा वर्ष 2013 में सामजिक सेवा, हिंदी सेवा हेतु सम्मानित

