Monday, February 23, 2026

मॉरीशस तथा भारत को जोड़ने वाली कड़ी : तुलसी-रामायण और मानस संगम

रोहित नारायण सिंह गत्ति (राजदूत मारीशस)

मॉरीशस तथा भारत के सांस्कृतिक सम्बन्ध काफी पुराने हैं। मॉरीशस के पूर्व प्रधानमंत्री सर शिवसागर रामगुलाम तथा पूर्व मंत्री दयानन्द बसन्तराय की भी मानस और हिन्दी के प्रति अपार श्रद्धा थी। इसी कारण ये विभूतियाँ मानस संगम से जुड़ी रहकर अपनी कृपा प्रदान करती रहीं। इसके अतिरिक्त पोर्टलुई से प्रकाशित हिन्दी साप्ताहिक (जनता) के कुशल सम्पादक एवं रामचरित मानस के पात्रों पर आधारित उपन्यासों के लेखक श्री राजेन्द्र ‘अरुण’ को मानस संगम द्वारा ‘साहित्य पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था। इस श्रृंखला को आगे बढ़ाया 28 अगस्त, 1947 को जन्में श्री रोहित नारायण सिंह गत्ति जी ने। शिक्षक से मॉरीशस के महामहिम राजदूत (हाईकमिश्नर) के गरिमा मंडित पद को सुशोभित कराने में उनकी कर्मठता, ईमानदारी एवं प्रतिभा-प्रज्ञा को सारा श्रेय जाता है।

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हिन्दी भाषा का मॉरीशस में जो भी विकास दृष्टिगत होता है, उसका सम्पूर्ण श्रेय महाकवि तुलसीदास और उनके साहित्य विशेषकर तुलसी रामायण को है। मैं श्री दयानन्द लाल वसन्तराय पूर्व मंत्री मॉरीशस के इस विचार से शत-प्रतिशत सहमत हूँ कि ‘यदि प्रारम्भ में गोस्वामी जी की कृतियों का सहारा न मिला होता तो हमारे देश में भारतीय दर्शन, संस्कृति और भाषाओं का जो समुज्वल रूप दिखाई दे रहा है, वही नहीं दिखाई पड़ता। वस्तुतः तुलसी ने मानस के माध्यम से सभी को जोड़ने का सफल प्रयास किया है। तुलसी रामायण ने भारत तथा मॉरीशस को जोड़कर सम्बन्धों की श्रृंखला को सुदृढ़ किया है। हम महाकवि तुलसी के ऋणी हैं। मानस संगम के अध्यक्ष डॉ. बद्री नारायण तिवारी विगत 50 वर्षों से तुलसी साहित्य का अनवरत् रूप से प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। यह उनका स्वर्ण जयन्ती कार्यक्रम है, एतदर्थ वह बधाई के पात्र हैं। मैं महाकवि तुलसीदास को अपनी श्रृद्धांजलि अर्पित करते हुए अपनी लेखनी को विराम दे रहा हूँ।

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