एक रोज शहीद-ए-आजम भगत सिंह के अन्य सहयोगियों में से एक रहे शिव वर्मा जी जो कानपुर में ही रहते थे उन्होंने शिवाला जाकर पंडित बद्री नारायण तिवारी से हमेशा की तरह मुलाकात की, जिसमें आग्रह करते हुए कहा कि तिवारी जी ने अपने नगर के साहित्य प्रेमियों व तुलसी अनुयायियों के लिए तुलसी उपवन की तो स्थापना कर दी है लेकिन अगर शहर में क्रांतिकारियों की स्मृतियाँ नहीं संजोई गई तो अगली पीढ़ी इन्हें कभी याद करना तो दूर बल्कि इनकी शहादत के बारे में जान भी नहीं पाएगी|
शिव वर्मा जी के इस विचार ने पं बद्री नारायण को इस कदर प्रभावित किया कि उन्होंने नई पीढ़ी की जानकारी हेतु स्वतंत्रता संग्राम में देश के शहीदों की भूमिका को प्रकाशित करने के उद्देश्य से कानपुर में शहीद उपवन नाना राव पार्क की स्थापना 18 सितंबर 1992 को की, जिसमें जन सामान्य की स्मृति में विलुप्त वीरांगना अजीजन बाई की प्रतिमा स्थापना और जीवन परिचय की खोज के साथ ग्रंथ-लेखन प्रकाशन कार्य। शहीद वीरांगना मैनावती की प्रतिमा स्थापित कर शहीदों के प्रिय गीतों के शिलालेख। “प्यामे आजादी के सम्पादक अजीमुल्ला 1857 में प्रकाशित कविता का आकलन और स्वतंत्रता सेनानियों के दस्तावेजों का शिलालेख में विवरण। भारत के सभी प्रदेशों के क्रान्तिकारियों की राष्ट्रीय कविताओं का उन्हीं की भाषा में शिलालेखों में अंकन। अमर शहीद 133 रणबांकुरों को अपनी जीवन शाखाओं में प्राणत्सर्ग कराने वाले “बूढ़ा बरगद का इतिहास लेख व शिलालेख।
” शहीद उपवन” स्थापना समारोह में देश के 22 क्रान्तिकारियों के मध्य शहीद भगत सिंह के अनुज सरदार कुलतार सिंह, सरदार राजेन्द्र सिंह और अशफाकउल्ला के पौत्र अशफाक उल्ला खां ने कहा कि संयोजक (बद्री नारायण तिवारी) ने आज हमारी आंखों के समक्ष भगत भैया व खां को लाकर खड़ा कर दिया है। 1857 क्रान्ति के अमर सेनानी तात्या टोपे के पौत्र नारायण राव टोपे भी बिठूर से भाग लेने आये थे। अध्यक्षता की भगत सिंह के साथी सेनानी शिव वर्मा जी ने जिन्होंने अण्डमान में काला पानी की सजा काटी थी |

