Monday, February 23, 2026

तुलसी सेवी व मानस प्रेमी थे श्री बद्री नारायण तिवारी जी : शिवाकांत जी महाराज

कानपुर, तुलसी उपवन व नाना राव पार्क के संस्थापक वरिष्ठ साहित्यकार रहे स्वर्गीय पं बद्री नारायण तिवारी जी की स्मृति में उनकी प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर प्रयाग नारायण शिवाला मंदिर प्रांगड़ में एक शाम का आयोजन हुआ, जिसमें धर्म गुरु एवं श्री मद भागवत परिवार सेवा समिति प्रमुख पं• शिवाकांत जी महाराज मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे|

कार्यक्रम की शुरुआत गज़ल गायक श्री प्रदीप श्रीवास्तव जी नें राम-मयी भजनों से की तो वहीं कार्यक्रम का संचालन डॉ• प्रदीप दीक्षित जी ने किया |

पं• शिवाकांत जी महाराज नें दक्षिण शैली के बने कानपुर के एकमात्र मंदिर प्रयाग नारायण शिवाला में आने के अवसर हेतु मंदिर प्रशासन का धन्यवाद देते हुए, प्रयाग नारायण शिवाला से तीर्थराज प्रयाग की तुलनात्मक विवेचना से वक्तव्य की शुरूवात की, पं• शिवाकांत जी नें राम चरित मानस के प्रसंगों से पं बद्री नारायण तिवारी जी के व्यक्तित्व के तत्वों की तुलनात्मक विवेचना करते हुए कहा कि ऐसा प्रतापी मानस सेवी वर्षों में एक बार जन्म लेता है, जो न्यूनतम संसाधनों में तुलसी की रामायण का ऐसा प्रचार कर दे कि तुलसी दास द्वारा लिखित ये ग्रन्थ जाति, धर्म और पंत की लकीरों से ऊपर अभिव्यक्त होने लगे|

ये श्री बद्री नारायण जी कि ही देन थी जो उन्होंने हिंदुत्व का परचम बिना गाजे-बाजे बिना किसी शोर-शराबे के इस तरह लहराया कि रोमानिया में अनुवादित हनुमान चालीसा के प्रकाशन का श्रेय भी उन्हें प्राप्त हुआ |

हम सब कथा वाचकों के श्रद्धेय पूज्य श्री रामकिंकर जी महाराज, जिन्हें युग तुलसी भी कहा जाता है, उनका भी श्री तिवारी जी के प्रति विशेष स्नेह था, इस बात का प्रमाण कुछ और नहीं बल्कि उनके जीवन के अंतिम वर्ष तक मानस संगम के कार्यक्रमों में किंकर जी की उपस्थिति है| राम किंकर जी के अतिरिक्त नाना जी देशमुख एवं मुरारी बापू जैसी धार्मिक शख्शियतें भी श्रद्धेय श्री बद्री नारायण जी के प्रशंसकों में एक रही हैं| श्री हनुमान जी कि भाँती विनम्रता और मृदु भाषा के धनी थे बद्री नारायण जी जिसके चलते उन्होंने विश्वभर के तमाम हिंदी सेवियों को सम्मानित करने के साथ ही साथ रामायण को घर-घर पहुँचाने वाले रामानंद सागर को भी मानस संगम के मंच पर ललित कला सम्मान से पुरुषकृत किया |

हिंदी सेवा के तमाम उदाहरणों के बाद इस देश में जब हिन्दुओं और मुसलमानों को लड़ाने के प्रयास हो रहे थे, उस दरमियान श्री बद्री नारायण जी के संपादन सहयोग से प्रकाशित पुस्तक “राम कथा और मुस्लिम साहित्यकार” ने अलग रौशनी पैदा की थी | जिस प्रकार भागवत कथा, जिस प्रकार रामायण के प्रसंग हमें धर्म, समाज और जीवन मूल्यों की शिक्षा देते हैं, उसी प्रकार श्रद्धेय तिवारी जी द्वारा देह दान के फैसले से उनका जीवन भी समाज के लिए उदाहरण ही नहीं बल्कि आदर्श बन गया |

कार्यक्रम में श्री बद्री नारायण तिवारी के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए नगर वासियों नें उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करी| कार्यक्रम में विशेष रूप से प्रयाग नारायण मंदिर के अध्यक्ष विजय नारायण तिवारी ‘मुकुल’, मंदिर प्रबंधक अभिनव तिवारी, राघव तिवारी, मनोज तिवारी, मनोज सेंगर, सतीश तिवारी, मयंक शुक्ला अशोक मिश्रा, राजीव यादव (एडवोकेट), मनोज सिंह, विजय प्रकाश त्रिपाठी, अनिल शर्मा, आनंद अवस्थी, श्याम अरोड़ा, राजोल शुक्ला आदि मौजूद रहे…

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