अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक संस्था ‘मानस संगम’ द्वारा तुलसी उपवन, मोतीझील कानपुर में पैतालिसवाँ तुलसी जयंती समारोह मनाया गया| कार्यक्रम की शुरुआत भक्ति संगीत अर्चना से हुई, प्रस्तुति भक्तियोग मिशन के पूज्य आचार्य योगेश जी महाराज एवं पं आचार्य गणेश जी की राम स्तुति एवं कजरी गायन के साथ हुई,भक्ति संगीत नें श्रोताओं को खूब लुभाया| तो वहीं डॉ• रेणु निगम एवं श्रीमती मनीषा सिंह ने भी संगीत अर्चना से कार्यक्रम का शुभारम्भ किया |
तुलसी उपवन के मुख्य द्वार पर राघव नारायण तिवारी ने मुख्य अतिथि श्री दिनेश शर्मा एवं अन्य सभी अतिथियों को पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया| कार्यक्रम में मा• सांसद एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश श्री दिनेश शर्मा ने कहा – “देश में कश्मीर से कन्याकुमारी तक रामचरितमानस को घर-घर पहुँचाने का काम बाबा तुलसी दास जी ने किया, प्रथम अवसर है जब मुझे बाबा तुलसी के इस महत्वपूर्ण उद्यान में आने का अवसर मिला, तुलसी जी की स्मृतियों को ताजा करने में जो योगदान शिवाला के मानस संगम परिवार का है, वो अद्भुत और देव दुर्लभ है| हमने भी लखनऊ में तुलसी शोध संस्थान में बहुत कुछ संजोया है मगर मानस संगम परिवार ने तो वाकई विरासत को बचा कर रखा है| रामायण पढ़ने से भी अधिक आवश्यक है कि उसको ग्रहण करिए| सबसे पहले रामचरितमानस लोग कहते हैं की वाल्मीकि जी ने लिखी थी मगर कई जगह उल्लेख मिलता है कि सर्वप्रथम बजरंगबली हनुमान जी ने रामायण लिखी मगर जब उन्हें लगा कि कहीं कोई गलती न हुई हो इसलिए अवलोकनार्थ हनुमान जी ने महर्षि वाल्मीकि जी को दिखाया तो उस दिन पूर्णिमा के दिन वे नौकाविहार कर रहे थे, पढ़ते हुए भावुकतावश श्री हनुमान द्वारा रचित ये मानस उनके हाथ से छूट कर पानी में गिर गई| जिसके चलते महाराज हनुमान जी ने कहा कि अब तो पुन: लिख पाने की छमता मुझमे नहीं, अब ये काम आपको करना पड़ेगा, जिसे स्वीकारते हुए महर्षि वाल्मीकि जी ने लिखने की जिम्मेदारी ली|
रामचरितमानस ने हिन्दू संस्कृति को सुरक्षित रखा आज ना सिर्फ मानस के विश्लेषण की आवश्यकता है बल्कि उसे युवाओं से जोड़ने की आवश्यकता है| सांस्कृतिक विरासत संरक्षण हेतु टूट रहे संयुक्त परिवारों को जोड़ने की आवश्यकता है, जिसके लिए नए बच्चों को उचित समय पर विवाह सम्पन्न करना चाहिए|
डॉ• दिनेश शर्मा ने कहा तुलसी उपवन पार्क को सर्किट में लाने की जो माँग है बेहद प्रशंसनीय है, वर्ष 1998 में मेरे द्वारा ही पर्यटन नीति में इस सर्किट श्रृंखला की योजना बनाई गई थी, जिस पर्यटन पर बाद में मैंने किताब भी लिखी और दो पी•एच•डी• भी करवाई| जब मैं लखनऊ मेयर था तो मैंने कानपुर के झंडा गीत रचयिता पदमश्री श्याम लाल गुप्त पार्षद जी के नाम पर एक पार्क का नाम करण किया था| मैंने उनके सम्मान का विषय राज्यसभा में उठाया था लेकिन जिस तरह कानपुर से सांसद रमेश अवस्थी ने संसद में इस विषय को एक विधेयक के रूप में पेश किया, ये बड़ी बात है|कानपुर अल्ल्हड़पन, अध्यात्म और आधुनिकता का संगम है, क्या सिर्फ गंगा नहीं बहती बल्कि ज्ञान की गंगा भी बहती है|
कार्यक्रम में राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार उ•प्र• सरकार श्री दया शंकर मिश्र ‘दयालु’ ने कहा की अपने जीवन में मैंने ऐसा उपवन आज से पहले नहीं देखा था, मानस संगम ने रामायण के हर चरित्र को मूर्त रूप में यहाँ प्रस्तुत कर दिया है| मैं काशी से आता हूँ वहाँ भी तुलसीदास जी के जीवंत प्रमाण आज भी संरक्षित और सुरक्षित हैं| कोई काशी जाए तो उनकी कुटिया का दर्शन करने के साथ ही तुलसी मानस मंदिर जरूर जाएं| जब बाबा तुलसी दास जी ने रामचरित मानस की रचना करी तब बेहद कठिन समय था सनातन संकट में था, मुग़लों का क्रूर शासन था लेकिन इसके बावजूद उन्होंने भगवान राम के जीवन को घर – घर तक पहुँचा दिया |
विधायक नीलिमा कटियार ने कहा – तुलसीदास सामाजिक समरसता के प्रतीक थे| हम स्व. बद्री नारायण तिवारी जी के संस्कारों के आभारी हैं जिन्होंने कानपुर की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना को पहचान दी, ये उनके द्वारा संप्रेषित संस्कारों का व्यवहारिक प्रमाण ही है जो मानस का पोषण निरंतर करता रहा है|
एम•एल•सी• अरुण पाठक ने कहा मानस सनातन धर्म का जीवंत दर्शन है किसी भी चरित्र और पात्र से बहुत कुछ सीखा जा सकता है| सीता जी से धैर्य, उर्मिला से त्याग, मंदोदरी से दूरदृष्टि सीखी जा सकती है| कैकई से राजनीति व सुरसा से रक्षा की पराकाष्ठता एवं सबरी से भक्ति सीखी जा सकती है|
एवं सांसद रमेश अवस्थी ने कहा रामचरितमानस से मानव चरित्र को बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है, निजी जीवन हो या सार्वजनिक जीवन मानस का साथ हमेशा प्रगतिवान होता है| कानपुर औद्योगिक शहर है, ये शहर क्रांतिकारियों का गढ़ भी था| यहाँ कोई राजा नहीं था यहाँ की संस्कृति आम नागरिकों की संस्कृति है, इस ही शहर में वाल्मीकि जी ने रामायण की रचना करी इसलिए ये बहुत प्राचीन और अद्भुत शहर है, हमें इस पर गर्व है| क्रांतिकारियों के शौर्य को उत्साहित करने वाले झण्डा गीत के रचना भी इस शहर के पद्मश्री श्याम लाल गुप्त पार्षद ने की थी| जब उनसे तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू जी ने पूछा था आपको क्या चाहिए तो पार्षद जी ने कहा था मुझे कुछ नहीं चाहिए बस मेरे इस झण्डा गीत को जन-जन तक पहुँचा दीजिए| इस गीत के लिए मैंने लोकसभा में विधयक लाया है|
अभिनव नारायण तिवारी ने श्री वेणु रंजन भदौरिया, भाजपा कानपुर अध्यक्ष अनिल दीक्षित, एम•एल•सी• अरुण पाठक व विधायक नीलिमा कटियार को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया| कार्यक्रम में कविवर दीन मोहम्मद दीन, कवि दिलीप दुबे एवं कवि अनिल दीक्षित ने अपनी काव्य प्रस्तुति दी|

मंच से गूँजी ये माँगे
कार्यक्रम में मंच से संवेद माँग उठाई गई कि मोतीझील स्थिति तुलसी उपवन में स्व. देहदानी डॉ. बद्री नारायण तिवारी जी की आदमकद मूर्ति लगवाई जाए जिसे जनता ने खूब सराहा, मानस संगम के अध्यक्ष विजय नारायण तिवारी एवं डॉ० प्रदीप दीक्षित ने मा० दिनेश शर्मा, मा० रमेश अवस्थी एवं कल्यानपुर क्षेत्र की विधायक नीलिमा कटियार से बिठूर की तर्ज पर तुलसी उपवन को भी रामायण सर्किट में सम्मिलित करने हेतु ज्ञापन भी सौंपा, कहा की इस कदम से अद्वितीय रामकथा पार्क का यश विश्व पटल पर स्थापित होगा।
विशेष सम्मान
कानपुर के पद्मश्री श्यामलाल गुप्त द्वारा रचित झंडा गीत को राष्ट्रीय गौरव दिलाने हेतु मा० सांसद महोदय ने उक्त संदर्भ में दिनांक 9 अगस्त 2026 को ‘राष्ट्रीय ध्वज गीत विधेयक’ को लोकसभा के पटल पर प्रस्तुत किया था। जिसके चलते सांसद रमेश अवस्थी को मानस संगम की ओर से अध्यक्ष विजय नारायण तिवारी ‘मुकुल’ ने तुलसी जयंती के अवसर पर विशेष रूप से सम्मानित किया। कार्यक्रम में लोकगीत एवं परम्परिक गायन हेतु श्रीमती कविता सिंह को डॉ• बद्री नारायण तिवारी स्मृति सम्मान 2026 से नवाज़ा गया|
अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूज्य बालयोगी श्री अरुण चैतन्यपुरी जी महाराज ने भगवान राम के चारित्रिक विवरण पर प्रकाश डालते हुए कहा रामचरितमानस प्रेम की परिभाषा है| राम को प्रेम करो कृष्ण से प्यार करो, छोटों बड़ों और परिवार से प्यार करो, पुष्प और प्रकृति से प्यार करो ये ही रामचरितमानस है|
के साथ कार्यक्रम का अंत किया|
पूर्व उप मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश श्री दिनेश शर्मा ने कार्यक्रम स्थल से लौटते वक़्त प्रयाग नारायण शिवाला मंदिर के दर्शन किए व मंदिर के ऐतिहासिक महत्व की जानकारियां प्राप्त करी|
कार्यक्रम का संयोजन विजय नारायण तिवारी ‘मुकुल’ ने किया व संचालन डॉ• प्रदीप दीक्षित व मनोज सेंगर ने किया| कार्यक्रम में मुख्य रूप से, प्रभाकर श्रीवास्तव, राजेश पाठक, गौरव पाठक, एड. जीतेन्द्र सिंह, डॉ. रमेश वर्मा, अनिल कुमार शर्मा, मुकेश श्रीवास्तव, सुनील दुबे, उमंग अग्रवाल, श्याम अरोड़ा, डॉ. बीना सिंह, डॉ• बी एन त्रिपाठी, अरुण कुमार मिश्रा, संजय बाजपेई, अशोक मिश्रा, संजय त्रिवेदी, रजोल शुक्ला, सुरेश गुप्ता, उमंग अग्रवाल, अभिनव तिवारी, अशोक मिश्रा, सतीश तिवारी,, राम गोपाल आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे|
